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sunita mishra

Drama

2  

sunita mishra

Drama

1-*शुकाल*

1-*शुकाल*

2 mins
231

रात दस बज रहे थे, ठंडी जोर पकड़ती जा रही थी। अनन्‍ता ने आवाज लगाई बेटा शुकाल अंदर आ जाओ। मैंने पुआल (धान का पैरा) का बिछौना बिछा दिया है ।अब मैं जा रहा हूँ जमीदार के खेतों के चक्कर लगाने। शुकाल झोपडी़ के अन्दर आ गया।उसे नींद ही नहीं आ रही थी ।वह जैसे ही आँख बन्द करता उसे किसी के चलने की आवाज आती ध..प,धप।

वह सोचता इतनी रात में कौन होगा। तातु (पिता) तो रात में लट्‍ठ पटककर चलते हैं। होगा कोई पर आँख झपकते ही वही

आवाज। बीस साल के शुकाल को आज डर लगने लगा। कोई जानवर होता तो उसकी आहट कुछ और होती। तातु का अभी

तक पता नहीं। अब क्या करूँ, उसने हिम्मत कर लाठी व मशाल उठाई और बाहर आ गया। जैसे ही उसकी सामने नजर

पडी़ वह भौंचक्‍का रह गया। उसके मुँह से एक शब्द भी नहीं निकल रहा था। ऐसा आदमी नुमा खिलौना जिसमें चाभी भरी

हो और वह चल रहा है। शुकाल ने लाठी पटकी मशाल आगे कर दी पर उसे कोई असर न हुआ। वह तो निरन्तर एक ही सीध पर बढ़ता आ रहा था।

शुकाल ने आवाज लगाई ता...तु..तभी तातु आ पहुँचे और बोले -शुकाल ! क्यों चिल्ला रहे थे। शुकाल ने जो देखा था कह सुनाया। वे बोले -कहाँ ? शुकाल ने उँगली से इशारा किया अभी यहीं था। तातु ने कहा- तुम उससे डरे तो नहीं। शुकाल ने ना में सिर हिला दिया। तातु उसका हाथ पकड़ बाहर ले गये और बोले-इनसे डरते नहीं। ये दूसरे ग्रह के मानव हैं और बहुत ताकतवर और प्रेमी होते हैं। तातु ने कहा- यह अपने साथियों से बिछड़ गया है। यह कुछ दिन हमारे साथ रहेगा। जैसे

ही इसके साथी आएँगे यह चला जाएगा। शुकाल ने हाथ बढ़ाया उस दूसरे ग्रह के मानव ने भी हाथ बढ़ा दिया ।अब दोनों साथ -साथ रहते और शुकाल बडा़ खुश रहता। आज शुकाल उदास था वह अपने दूसरे ग्रह के मित्र से बिछड़ जो रहा था।


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