ज़ुनून
ज़ुनून
ज़ुनून की हो आग मन में, तू नहीं किसी से कम।
जल बनकर मशाल, मिटा अपने भीतर का तम।
उठ बढ़ आगे , अपनी प्रसुप्त शक्ति को जगा।
बन चैतन्य , आलस्य परनिर्भरता को दूर भगा।
मेहनत की राह न छोड़ना, बनाये रखना विश्वास।
ला कुछ परिवर्तन तू भी , बना एक नया इतिहास।
कर पल-पल का सदुपयोग ,फैला दो जहाँ में रोशनी।
सुकर्मों की ख़ुशबू से , बन जाये कोई अमर कहानी।
