STORYMIRROR

Sonias Diary

Abstract

3  

Sonias Diary

Abstract

ज़मीन हिन्दू की

ज़मीन हिन्दू की

1 min
400

आज हर घर दिये जले

हिन्दू मुस्लिम एकता के

एक सुबूत रूपी फैसले के

खुश हुए दोनों


अयोध्या की धरती को पा

खुश हुए दोनों

कितनी छोटी खुशियां इनकी

कितनी छोटी अभिलाषाएं हैं


मांग रहे थे ज़मीन वो

सिर्फ नाम की इज़्ज़त की

और अपने भगवान की


बस नाम कर्म ओर है क्या

सम्मान इज़्ज़त प्यार के सिवा

पैसा ज़मीन तो सब यहीं

रह जानी है


दूजे के हिस्से सोनिया

दो भीगा ज़मीन

तो आनी है

मगर अपने हिस्से


मां गंगा का बहता पानी है

अंत ज़मीन नहीं

हिंदुत्व की राख

हिंदुत्व में मिल जानी है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract