STORYMIRROR

Alok Singh

Romance

3  

Alok Singh

Romance

ज़खमी ख्वाब (शेर _2)

ज़खमी ख्वाब (शेर _2)

1 min
396

तर्क-ए - तअ'ल्लुक ही करना था  

तो पास में आये क्यूं थे?

यूं बेरुख होना था तो  

जज़बात जगाये क्यूं थे?

क्यूं सजाये थे  

मेरी पलकों पर अपने सपने?

हाथों में मेरे नाम की मेहंदी रचाये क्यूं थे।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance