STORYMIRROR

sakshi shiv

Drama

5.0  

sakshi shiv

Drama

ज़िंदगी

ज़िंदगी

1 min
356


जब हम गीरेगे तभी तो ऊठेगे।

जब हम ऊठेगे तभी तो बड़ेगे।

जब हम बड़ेगे तभी तो जियेंगे।


जब हम जियेंगे तभी तो हसेंगे।

ज़िंदगी यही है बस जीते चलेंगे...

कारवह यही हे बस हँसते रहेगे

बस हँसते रहेगे...!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama