ज़िंदगी एक जिद
ज़िंदगी एक जिद
परिंदे की घोंसले सी लटकी सी ज़िंदगी
हौसला इस घोंसले सी दिखती जिंदगी
करते हो कुछ तो बखानना ज़रूरी नहीं
कर गुजरने की नाम होती है ज़िंदगी।
छोर में छोर मिल जाते, जिस घोंसले में
जैसे घुल जाती खुशुब, हवा की मेले में।
मिला लो सात सुरों को, तराने बनेंगे
ताल से ताल मिला, बना सुरीली ज़िन्दगी।
चील का चालाख उड़ान पंखों का फैलाव
बाज़ का बाजू का बल पकड़ का दबाव।
बरगद के शाख में बैठा गिद्ध के नज़रों का
शातिर शिकारी तेवर, ज़बर है ज़िंदगी।
कठफोडवा के चोंच से पैनी पन जितनी
उसकी गर्दन की ताकत भरपूर उतनी।
सटीक निशान निरंतर प्रहार प्रचंड सा
दृढ़ निश्चय, अनमिट स्वाक्षर सी ज़िंदगी।
मिनरंका की आंख का रप्तारी सफर से
गिरता छलांग भेदता लक्ष छपाक से।
बचाव का सोच भी आचंभित हो जाये
अतर्कीत आक्रमणों का ज़िद्द है ज़िंदगी।
आसमाँ भी नीला काला लाल हो सकता
ज़िंदगी स्नेह मोह का जाल हो सकता
मैदान जंग में डटा सिपाही सालार सा
ज़िद जुनून जज्बातों की हद है ज़िंद।
