युवा तू कितनों की दुआ.....।
युवा तू कितनों की दुआ.....।
युवा तू कितनों की दुआ,
कितना कठोर है तू मालपुआ,
मात-पिता की आस तू,
अडिंग लक्ष्य के पास तू,
युवा तू कितनों की दुआ.....।
है नदी का नाला तू,
देश का भाला तू,
कर प्रहार झटके से,
अब तुम ही पानी भरेगा मटके से,
युवा तू कितनों की दुआ.....।
पल-पल से संजोया जिंदगी,
बूंद बूंद से मिटाई गंदगी,
खेली बाजी खाली ही सही,
पर अबकी बार बगीचा का माली ही सही।
युवा तू कितनों की दुआ.....।
तू है देश की शान,
गर्व करता है तेरे पे किसान,
रण में चली तेरी तलवार,
अब तू ही है विष्णु का अवतार
युवा तू कितनों की दुआ.....।
आसमान की तू गर्जन है,
12 जोड़ी की तू दर्जन है,
होता है खड़ा अपने बल पर,
फिर देख कितने खड़े होते हैं तेरे तल पर,
युवा तू कितनों की दुआ.....।
धन मिले तो धन्यो ही सही,
अन मिले तो अन्यों ही सही,
अब पत्थर से भी आग निकलनी चाहिए,
पर अब कीचड़ से झाग निकलना चाहिए
युवा तू कितनों की दुआ.....।
समंदर की लहरें अशांत, क्यों
हुनर है तो शांत क्यों, युवा
उठा शस्त्र कर वार,
अबकी बार नहीं तो अबकी बार पार
युवा तू कितनों की दुआ.....।
