युवा हो तुम!
युवा हो तुम!
चल पड़ो उस रह में, जहाँ सब का साथ हो।
चल पड़ो उस रह में, जहाँ देश का विकास हो।
पहचनो खुद की शक्तियों को ,न तुम इनसे छुपो।
युवा कहते हैं लोग तुम्हें, अपने काम से तुम न भटको।।
देश का भविष्य हो तुम, तुमसे ही कल और आज है।
तुम्हारी हर एक सोच हर एक शब्द, उन्नति का आग़ाज़ है।।
सोच समझ कर कदम उठाओ, देश की डोर तुम्हारे हाथ है।
युवा हो तुम, पर्वतों को चीर देने वाला हौसला तुम्हारे पास है ।।
छाकर तुम अब आसमान में रवि सा यूँ प्रकाश करो।
देश को नई ऊर्जा देकर उन्नति अब ललाट करो।।
आओ एक नये राष्ट्र का निर्माण करें,जो कभी किया नहीं वो काम करें।
जिसमे कोई भी रंग न हो,कोई जाती और कोई धर्म न हो।
प्रेम भाव इक सा हो सबमें,सब एक दूजे का सम्मान करें।।
दृढ़ संकल्पी बहुत हो तुम, आत्मनिर्भर भारत की बुनियाद हो तुम ।
विकास की पहली नींव हो तुम, स्वावलंबी भारत की पहली पहल हो तुम।।
युवा हो तुम, मान्यता है तुम्हारे विचारों की।
हर कदम बढे तुम्हारा उन्नति की तरफ, यही आस है हमारी ।।
