ये लम्हे
ये लम्हे
बीत कर भी बीतते नहीं कुछ लम्हे
देते रहते हैं मन पे दस्तक कुछ लम्हे
दिल के कोनों में में बस जाते हैं वो लम्हे
आँखों की नमी में ठहर जाते हैं वो लम्हे
कभी बातों में बिखर जाते हैं वो लम्हे
कभी लफ्जों में उतर आते हैं वो लम्हे
कभी यादों के झरोखों से झाँकते वो लम्हे
कभी तस्वीरों से निकल आते वो लम्हे
कभी सुर्ख एहसासों से महकाते वो लम्हे
कभी जख्म की टीस से कराहते वो लम्हे
कभी तन्हाईयों में भी "भर भर" जाते वो लम्हे
कभी भीड़ में भी "तन्हा" कर जाते वो लम्हे
कभी बस यूँ ही छू के गुजर जाते वो लम्हे
कभी कोशिशों से भी नहीं सरक पाते वो लम्हे
बीत कर भी बीतते नहीं कुछ लम्हे
देते रहते हैं मन पे दस्तक कुछ लम्हे
