ये कैसी आजादी
ये कैसी आजादी
ये कैसी आजादी मिली है हमको
जहाँ समझौते की बात आई है
आजाद होकर भी लगता आज हम
गुलाम परिन्दें की भांति पिंजरे में
आजादी की खातिर फड़फड़ा रहे हैं
आज हम और हमारा ये पूरा विश्व
विश्वयुद्ध की कगार पर खड़ा हो गया
कहाँ जाए और किससे क्या कहे हम
अब क्या हम किसी से गुहार लगाये
तिल –तिल कर मर रहा यहाँ पर
आज देखो तड़पता हर इंसान है
ये कैसी आजादी मिली है हमको
जहाँ समझौते की बात आई हैI
इतनी सुख सुविधाएँ है संसार में
न जाने ये सब अब किस काम की
लाचार हो रहा है हर इंसान यहाँ
न जाने अगले पल क्या हो जाएगा
मेरे अपने जो साथ मेरे या मैं भी
कल का सूरज देख पाउँगा या नहीं
डर –डरकर जी रहा हर इंसान है
रोज खो रहा अपनों की जान है
ये कैसी आजादी मिली है हमें
जहाँ समझौते की बात आई है I
क्या आज फिर कोई नई क्रान्ति आएगी
दुनियां फिर से क्या संभल पाएगी
क्या फिर खुशियाँ चमन में महकेगी
कब वो उजला सूरज निकलेगा
कब वो सुबह फिर सुहानी होगी
जब सच की आजादी मिलेगी
जब सच की आजादी मिलेगी
ये कैसी आजादी मिली है हमें
जहाँ समझौते की बात आई है।
