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Tripti Dhawan

Abstract

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Tripti Dhawan

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ये जो धुआँ है

ये जो धुआँ है

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हर तरफ जो ये धुआँ है,

क्या ये हमारी उपलब्धियों की गवाह है ?


तरस आ गया खुद पर

कि यही हमारे रहने की जगह है।


हर तरफ ये जो धुआँ है,

ये हमरी तरक्कियों की गवाह है।


शर्म आ गई ये सोच के,

कि यही हमारे बीमारियों की वज़ह है।


हाँ, हर तरफ जो ये धुआँ है,

यही हमारी उपलब्धियों की गवाह है।


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