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Prashi Joshi

Abstract


4.0  

Prashi Joshi

Abstract


ये हाथ लिखते है ...

ये हाथ लिखते है ...

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ये हाथ लिखते हैं, 

कोरे कागज पर लाखों ज़ज्बातों को , 

कुछ दुनिया की रस्में , कुछ अपनी बातों को , 

ये हाथ लिखते हैं , 

कुछ पुरानी कहानियां , कुछ नए किरदार , 

कभी असल ज़िन्दगी , कभी सपने हज़ार , 

ये हाथ लिखते हैं , 

कुछ नादान चेहरे , कुछ राज़ मुखोटों के , 

वो हंसते मुस्काते चेहरे , कुछ घाव चोटों के , 

नित कुछ नया सीखते हैं , 

हां , ये हाथ लिखते हैं । 


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