STORYMIRROR

Kavita Sharrma

Abstract

3  

Kavita Sharrma

Abstract

माँ

माँ

1 min
189

इंसान ही है जो भावनाओं से बंधा है

बंधन में बंधना उसे स्वीकार्य हुआ है

परिवार से उसकी खुशियां जुड़ी हैं

सबके संग ही प्रेम बाँटने में बरकत बड़ी है 

माँ और संतान का रिश्ता है अनमोल

निस्वार्थ प्रेम का असीम है छोर

संतान की खुशियों पर बलिहारी है जाती

सोता उसे देखकर मंद मंद है मुस्कुराती 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract