ये दिल दीवाना
ये दिल दीवाना
जब माना ना,ये दिल दीवाना
कलम उठाई, तुझे लिख दिया जाना
जब माना ना..................
क्यों तूने मुझे माना नही,
क्यों तूने मुझे पहचाना नहीं
अब तेरे संग जीना है मुझको
अब तन्हा मुझको रहना ना
जब माना ना............
वो लम्हें मुझे याद आते हैं,
जिसमें मेरे तू शामिल था
सावन के मौसम में तू,
भीगा-भीगा मेरा हर पल था
तुझको बारिश,तुझको तपिश
तुझको हर मौसम सा लिखा जाना
जब माना ना.............
तू मेरा हो जाये सनम
तुझको अपना मैं बना लूँगा
तुझको चाहूँगा सिर्फ तुझे
दिल में तुझको ही बसा लूँगा
चाहत तुझसे है बहुत मुझे
ये सच कहता हूँ मेरी जाना
जब माना ना...............।

