STORYMIRROR

Shalini Tripathi

Abstract

3  

Shalini Tripathi

Abstract

ये दौर वो दौर

ये दौर वो दौर

1 min
11.8K

ज़िंदगी के इस दौर 

पर जब बैठ के किया ग़ौर 

अपने लिए वक़्त नहीं दिया

ख़ुद को और भी सख़्त कर लिया

क्या खोया क्या पाया

यहीं पर धूप यहीं पर छाया।

ज़िंदगी में ख़ुशी बहुत

पर दुःख का भी दौर आया।

पर ख़ुशी की हर दौर ने

दुख के हर ग़ौर को भुलाया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract