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Kavita Sharrma

Abstract

3  

Kavita Sharrma

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यादों के पन्ने

यादों के पन्ने

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यादों के पन्ने फिर खुले जब

शब्द मानो तस्वीर बन उभर आए


बीतें पलों में बिताये वो पल 

फिर मानो हकीकत में लौट आए


बड़े सहेज कर रखा है इस किताब को

कुछ नया शायद इसमें कुछ जुड़ पाए।


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