STORYMIRROR

Kavita Sharrma

Abstract

3  

Kavita Sharrma

Abstract

यादों के पन्ने

यादों के पन्ने

1 min
342

यादों के पन्ने फिर खुले जब

शब्द मानो तस्वीर बन उभर आए


बीतें पलों में बिताये वो पल 

फिर मानो हकीकत में लौट आए


बड़े सहेज कर रखा है इस किताब को

कुछ नया शायद इसमें कुछ जुड़ पाए।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract