STORYMIRROR

Tatwashil Pawar

Romance

2  

Tatwashil Pawar

Romance

यादगार

यादगार

1 min
145

गुजरे हुऐ वक्त का फसाना

बन गया हूँ।


याद भी ना कर पाओगी

वो अफसाना बन गया हूँ।


यूँ तो मुक्कदर बदलना

बस में ना था मेरे,


पर बिगड़ी हुई तकदीर का

मैं यादगार बन गया हूँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance