यादें
यादें
आज फिर इन आँखों में उदासी छाई है,
ना चाहते हुए भी तेरी याद चली आई है।
मेरे माज़ी की यादें कुछ इस तरहां दिल पर छाई हैं,
जैसे हर लम्हां मेरे साथ मेरी परछाई है।
देखती हूँ जब भी किसी शख्स को ग़ौर से,
उसके चेहरे में बस तेरी सूरत ही नज़र आई है।
तेरी नज़रों में भरी वो नफ़रत भूले ना भुलाई है,
दर्द की वो सिसकी आज भी मेरी सांसों में समाई है।
