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aazam nayyar

Abstract

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aazam nayyar

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याद

याद

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वो दिल से ही बहुत आज़म कठोर है

रिश्तें की इसलिए वो टूटी  डोर है  


जैसे कोई जशन हो गीत ग़ज़लों का 

की हो रहा गली में ख़ूब शोर है 


उससे मिला ख़ुदा अब जिंदगी भर को 

यादों का रोज़ दिल पे जिसकी जोर है


कोई तो जिंदगी में दोस्त हो सदा 

वरना ये जिंदगी भी तन्हा बोर है 


आता नहीं ख़ुशी का एक भी पल जो 

ये कैसा चल रहा जीवन में दौर है 


तू बैठ पास आज़म दिल भरा नहीं 

करनी मुहब्बत की बातें कुछ और है.

आज़म नैय्यर 


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