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Chandrakala Bhartiya

Inspirational

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Chandrakala Bhartiya

Inspirational

याद पिता की आती है

याद पिता की आती है

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ठुकराया जब - जब जग ने

याद पिता की आती है.

किसके कांधे सिर रख रोऊँ

टीस यही सताती है.


पिता से ही जहाँ था मेरा

होती हर चाहत पूरी

मांगा एक खिलौना जब भी

ढेर लगा दिया पापा ने.


स्कूल, कॉलेज में नाम कमाया

सिर माथे चढाया पापा ने

अभिमान से सिर ऊंचा हो गया

तुरंत गले लगाया पापा ने.


मेरे गीले- शिकवे, तारीफें

किसको अब सुनाऊँ मैं .

भीड भरी इस दुनिया में

ढूंढती नज़रें मेरी पापा को.


मिलता अग्रज में साया पापा का

आलिंगन झट कर लेता भाई का

सुकून दो घड़ी मिल जाता मुझको

लगता जैसे पापा ही हैं.


आए बड़ी मुसीबत जीवन में

परेशां बहुत हो जाऊँ मैं

हे परमेश्वर! विनती मेरी सुन लेना

दो घड़ी मेरे पास, पिता को तुम भिजवा देना.


आप-सा पिता पाकर धन्य हुआ मेरा जीवन

चरणों में आपके शत् शत् नमन्

शत् शत् नमन्.



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