वक़्त की बाते......
वक़्त की बाते......
मुड़ मुड़ के तू ना देख
जो बीत गया वो बीत गया,
ये तो वक़्त है मेरे यार
कुछ तू खोया, कुछCc तो पाया.
जो तू खोया, वो कल के थे
जो पाया, वो तो अब साथ है,
कल को यादों में बसा ले
आगे के लिए ये तो काफ़ी है.
ये खोने की फ़िक्र न कर
वक़्त का तो अब ख्याल कर,
ये तो कहीं ठहरता नहीं
इसके साथ तू चला कर.
ना जाने तू कब क्या होगा
आज है हम, कल हों ना हों,
पर ये वक़्त तो साथ है
उसकी तुम कदर कर लो.
नहीं तो फिर ना कहना
ये वक़्त को दोष नहीं देना,
ये तो आनी जानी है यहाँ
तुम उसका साथ रहना.
जब आये, वक़्त साथ था
जाएंगे, वक़्त साथ न देगा,
रिश्ते नाते, वक़्त ने दिए
यहाँ कुछ यादें ही रहेगा.
किस बात की है गुमान
ये कुछ दिन के मेहमान
जब वक़्त साथ ना देगा
तब मिट जाएंगे सम्मान.
अब तो कुछ समझ लो
ये वक़्त को तो जरा देख लो
चार दिन के ये जिन्दगी
तब तक तो कर्म कर लो.
