STORYMIRROR

VIVEK ROUSHAN

Abstract

4  

VIVEK ROUSHAN

Abstract

वक़्त गुज़र जाएगा

वक़्त गुज़र जाएगा

1 min
175

भोर को इंतज़ार है शाम का 

शाम बेचैन है रात के लिए 

रात को पता है कि 

पलक झपकते हीं वो बीत जाएगी 


आँखें खुलते ही

वो अपने पास भोर को पाएगी

फिर भोर को इंतज़ार होगा शाम का 

शाम बेचैन होगा रात के लिए 


रात तड़पेगी भोर से मिलने के लिए 

इसी इंतज़ार, बेचैनी और तड़पन 

में वक़्त गुज़र जाएगा

दिन का दुःख 


और रात का तड़पन 

चारों दिशाओं में पसर जाएगा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract