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suraj singh

Romance

4  

suraj singh

Romance

वो तुम थे

वो तुम थे

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हाँ वो तुम थे

मेरी है सास में तुम थे

मेरी हर अस में तुम थे


मेरी जुबा की आवाज भी तुम थे

मेरे होठों की प्यास भी तुम थे


मेरी हर हसीं में तुम थे

खुश जब होता तो

वो खुशी भी तुम थे


मेरी दिल की

धड़कन भी तुम थे

और इस दिल की

तड़पन भी तुम थे


रातों के हर ख्वाब में तुम थे

सुबह की हर रंग में तुम थे

और जब तोड़ा

किसी ने दिल हमारा


पूछा तुझे तोड़ने वाले

कौन है इसने कहा

कि वो तुम थे।


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