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Manoj Kumar

Romance Thriller

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Manoj Kumar

Romance Thriller

वो मुझे बुलाती है

वो मुझे बुलाती है

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सजाएं बैठी हैं आशाओं की महफ़िल

उनकी नज़रे मेरे लिए कातिल हैं।

वो मुझे बुलाती हैं।

कुछ जुनून हैं उनपर ..

मुझसे मिलने का 

अपने दिल की बातें करने का


बहुत दिन हुए गए नहीं..

उनके पास..

उनकी गुलाबी आंखें

मुझ पर इशारा करती हैं।

वो मुझे.........................।


पता नहीं क्यूं बुला रही हैं।

इतनी तेजी से

यादें उनकी इसी तरह

छिप- छिपकर..


मेरे ख्वाबों तक पहुंचकर

लगता हैं बेपनाह मोहब्बत

तो नहीं कर बैठी मुझसे

दीवानी हो गई हो वो..


मेरे साथ कुछ दिन बिताते हुए

इसी लिए वो आती हैं

फिसलती हो मेरे प्रति

बंजर दिल पर होकर

पाने की सांसे भरकर

उनकी यादें सताती हैं।

वो मुझे.......................।


क्या हैं उनकी इरादे,

जो मुझे इतना प्रेम से बुला रही हैं।

न जगता हूं,

न सो पाता हूं सही से

आती हैं वही आती हैं,

चुपके से बुलाती हैं।


न सही से काम हो पाता जिंदगी के

बस उन्हीं के इंतजार में रुक जाता हूं।

उस दिन की मुस्कान बुलाती हैं।

वो मुझे.......................।


कैसे जाऊं उनके पास

घेर रखा हैं मुझे दूरियों के गम

उनको क्या पता

वो तो राहें देखती होगी


अरमान भी हैं दिल में मुझे बसाने का 

सिंगार किए होगी

मेरे लिए

आंखो में मेरी परछाई होगी

आसमानों के तारे गिनकर

वो तो प्यास बुझाती होगी


उनको मेरे प्रति बहुत दूर होगा

नींद भी ओझल हो गई होगी

क्या कहूं उनकी परछाई

मेरी आंखों में मचलती हैं।

वो मुझे..........................।


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