वो जल रहा है
वो जल रहा है
कविता : वो जल रहा है
काली दाढ़ी सफेद हुई जा रही है
झुर्रियां भी आकार बढ़ा रही हैं
सत्ता सुंदरी कहीं नजर आती नहीं
हताशा भी अपना रंग दिखा रही है
वो गुस्से में आलू सा उबल रहा है
वो जल रहा है , वो जल रहा है ।।
सोने का चम्मच है लेकर के आया
"बुड्ढे" पे मम्मी की है छत्रछाया
संसद में बहिन का गाल खेंच आया
कोट के ऊपर है जनेऊ लटकाया
पल पल उसका हुलिया बदल रहा है
वो जल रहा है , वो जल रहा है ।।
जाति के नाम पर देश तोड़ रहा है
हमारी एकजुटता को वो फोड़ रहा है
चीन का माल फूंक तलवे चाट कर
आई एस आई से रिश्ते जोड़ रहा है
उसके हर कृत्य से देश द्रोह निकल रहा है
वो जल रहा है , वो जल रहा है ।।
मोहब्बत की दुकान का शटर गिर गया
जेहादियों उन्मादियों से वो घिर गया
केरोसिन तो उसने छिड़क ही रखा है
लाइटर भी उसके हाथ से गिर गया
देश में आग लगाने को मचल रहा है
वो जल रहा है , वो जल रहा है ।।
खाली संविधान की लाल किताब लेकर
सफेद झूठ की गठरियां बेहिसाब लेकर
थाइलैंड से लेकर वियतनाम भी घूमा
लौटा है हर बार एक टूल किट बन कर
कुत्सित इरादों से पूरा देश दहल रहा है
वो जल रहा है , वो जल रहा है ।।
श्री हरि
10.4.2025
