वो भी एक दौर था
वो भी एक दौर था
वो भी एक दौर था, जब तू मेरे करीब था
सारेे अरमान मेरे तुझसे,
गम कही पास न था
बस तू मेरे साथ था,
तेरी खुशबू मेरे सांसों में थी
जुस्तजू कोई बाकी न थी,
कुछ ही महीनो मे तेरा नकाब हट गया,
सच कहूँ जैसे गहरा बादल कही छट गया
अंधेरे मे थी, महरूम थी हर बात से
तेरी हकीकत जान मानो,
आँखों पर परदा सा पड़ गया
डर गई थी मैं सहम सी गई,
खुद की जान बचाकर मैं
जो घर से निकली मै,
हजारों सवाल सिर्फ मुझसे हुए
जवाब देते देते मैं थक गई
अब जीना चाहती हूँ
कुछ करना चाहती हूँ
मैं अब खुद के लिए जीना चाहती हूँ।
रहम पर नही खुद के पैरो पर खड़ा खुद को देखना चाहती हूँ,
बिना वजह ही हँसना चाहती हूँ
मै खुद के लिए जीना चाहती हूँ.
