घड़ी की सुई से भी तेज चलना है,
वक्त को पीछे छोड़ आगे भागना है,
कामयाबी के उस शिखर को पा लिया है
अब उस उंचाई से भी ऊपर जाना है,
कोई साथ चले या ना चले,
अपने साथ आये या ना आये,
हमें बस भागना है।
भले ही ये पल बीत जाए,
इसमें छायी ख़ुमारी बीत जाए,
तुम बस अपने ज़र्रे - ज़र्रे को घिसते चलना
तलवे से गर लहू भी आए ना,
तो परवाह मत करना
भले ही घिसते- घिसटते पैर ही क्यों न कट जाए,
हाथ आए कामयाबी, रुतबे के आगे क्या मजाल
जो कसक भी निकल आये,
रिश्तों की रवानगी ख़त्म हो जाए तो क्या,
उस उंचाई पर पहुँचते ही सब भागे चले आयेंगे,
और गर नहीं आए तो..?
क्या हो गर उस उंचाई पर तुम बिल्कुल अकेले पड़ जाओ,
तब क्या रास आयेगी वो कामयाबी तुम्हें?
मसलन कामयाबी जरूरी है,
पर अपने -अपनो के साथ।