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Anu Sharma

Tragedy

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Anu Sharma

Tragedy

आईना

आईना

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घमंड में चूर हो,इंसान को भगवान बनते देखा,

आज प्रकृति के एक फूंक से उसे 

तिनके की भांति उड़ते भी देखा।

मौत के शैय्या पर तो

इंसानियत बहुत पहले लिटा दी गई थी,

पर अब तो उसका जनाज़ा भी उठते देखा।

मगरूरियत के नशे में चूर इंसान को तो अब

अपने-अपनों से भी लड़ते देखा,

इंसान तो बहुत मरे,

अब तो इंसानियत को भी मरते देखा।

पर इन कीचड़ों के दलदल में,

एक उम्मीद के कमल को भी खिलते देखा।

                                 


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