STORYMIRROR

Bhawna Kukreti Pandey

Abstract

4  

Bhawna Kukreti Pandey

Abstract

वजह

वजह

1 min
545

पुरानी दीवार घड़ी

के पेंडुलम में

मैंने अपना गूंगापन

सी दिया है।


जानते हैं,

पेंडुलम धातु का था

और मेरी उंगलियां

हाड़ मांस की।


मुश्किल था

लेकिन उंगलियों में

आते ही

वो छोटी सी धातु की सुई

आसान हो गया सीना

चुप्पी पेण्डुलम के

सीने पर।


इतने बरस

में ये ही जाना है

लोग बेबस

अपनो की वजह से

ही होते हैं।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract