विश्व एड्स दिवस
विश्व एड्स दिवस
एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम’ एड्स का पूरा नाम है।
एड्स एक जानलेवा बीमारी हैं स्वयं एड्स मृत्यु का दूसरा नाम है।
एड्स इंसान को जीते जी मरने को विवश कर देता है।
एड्स होते ही समाज क्या सारी दुनिया ही हमें कलंकित करने लगता है।
यह बीमारी एच.आई.वी. वायरस से होता है
यह बीमारी मनुष्य के प्रतिरोधक शक्ति को कम कर देता है
एड्स एच.आई.वी. पॉजिटिव गर्भवती महिला से उसके बच्चे को भी हो सकता है।
एड्स संक्रमित रक्त के प्रयोग करने से भी हो सकता है
एच.आई.वी. से संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित संभोग करने से भी हो सकता है।
एड्स बीमारी दुनिया के सामने घातक बीमारी के रूप में उभरकर आया है।
एड्स साक्षात मौत का रूप बनकर पूरी दुनिया पर छाया है
एड्स बीमारी का कोई इलाज नही है।
एड्स बीमारी में छुपा जैसे गहरा राज कोई
एड्स बीमारी को हल्के में लिया नही जा सकता
एड्स बीमारी से समझौता किया नही जा सकता।
एड्स बीमारी का एकमात्र इलाज बचाव है।
एड्स बीमारी से बचाव हो यही इसका प्रस्ताव है।
एड्स बीमारी से खुद को बचाए
एड्स के प्रति लोगो में जागरूकता लाए
सावधानी हटी दुर्घटना घटी यह शब्द एड्स के लिए प्रयुक्त हो सकता है।
एड्स की बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को ना ध्यान दें तो हो सकता है।
एड्स असुरक्षित यौन संबंधों से ही नहीं संक्रमित इंजेक्शन वजह से भी फैल सकता है।
एच.आई.वी.पॉजिटिव महिला के प्रसव के दौरान शिशु को स्तनपान कराने से भी
यह बीमारी शिशु को भी हो सकता है।
दूसरे लोगों के ब्लेड,उस्तरा और टूथ ब्रश का इस्तेमाल करने से भी
एच आई वी का खतरा हो सकता है।
आज हमारा उद्देश्य बस इतना है।
किसी अपने को अब ऐड्स से ना मरना है
आओ ऐड्स दिवस मनाए
एड्स के प्रति जागरूकता फैलाएं।
