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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

वीरों के वीर

वीरों के वीर

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वीरों के वीर

धीर बड़े गंभीर

स्वाभिमान खातिर

छोड़ दी महल खीर


ऐसे वीर शिरोमणी

महाराणा प्रताप के,

आज जन्मदिन पे

गाओ खुशी के गीत


सदियों में कभी-कभी

ऐसा रण-बांकुरा होता है

जिसके नाम लेने मात्र से,

लगता हाथों में है, शमशीर


वीरों के वीर

धीर बड़े गंभीर

उनकी याद से,

आता अक्षु नीर


मेवाड़ी सरदार

एकलिंग दीवान

उदयसिंह पुत्र,

सत्य के थे समीर


जयंताबाई के बेटे

भीलों के थे कूका,

प्रजा की समझते थे

वो तो सब ही पीर


वीरों के वीर

धीर बड़े गंभीर

कहीं शत्रु के सीने,

दिए उन्होंने चीर


चेतक था प्रिय घोड़ा,

स्वामीभक्ति थी प्रसिद्ध

एक छलांग में, वो तो,

नाले के पहुंचा दूजे तीर


ऐसे ही एक हाथी था

रामप्रसाद नाम का,

शहीद हो गया,

अकबर उसके भी,

न बांध पाया जंजीर


अकबर को बोलना पड़ा

जिसके जानवर इतने वीर

उसे क्या खाक मार पाऊंगा

गुलामी की में कोई तीर


वीरों के वीर

धीर बड़े गंभीर

घास रोटी खाई,

नहीं दिखाई पीठ


स्वाभिमान के लिये

जंगल-जंगल भटके

महल-सुख छोड़ दिया

वो थे सच्चे रणवीर


आखिर छापामार युद्ध से

जीत लिया मेवाड़ फिर

अकबर मान मर्दन किया,

दिखाया उसे मेवाड़ी जमीर


वीरों के वीर

धीर बड़े गंभीर

महाराणा प्रताप,

हमारे रहेंगे सदैव,

वो भीतरी शरीर


आपकी जय हो

महाराणा प्रताप

आप हो,

वीरों के वीर


पूरी ही दुनिया

गाती आपके गीत

ऐसा दिखाया पौरुष

अकबर भी हुआ मुरीद


वीरों के वीर

धीर बड़े गंभीर

महाराणा प्रताप है

और सदा ही रहेंगे

हमारे आदर्श वीर


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