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Sunita Shukla

Inspirational

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Sunita Shukla

Inspirational

वीर उठो हे धीर उठो

वीर उठो हे धीर उठो

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आज हिमालय की चोटी से,

दुश्मन ने ललकारा है ।

वीर उठो हे धीर उठो,

अब आया वक्त तुम्हारा है।

जन-जन की अब माँग यही है,

वीरों तुम संधान करो ।

मिग मिराज और राफेलों से,

नापाकों पर वार करो।

जिसने आँख दिखाई हमको,

तार-तार कर उसका सीना।

चुन-चुन कर मारों तुम उनको,

करके एक खून पसीना।

भूल गए हैं कारगिल जो,

उनको याद दिलाना है ।

पठानकोट और पुलवामा का,

बदला आज चुकाना है ।

गलवान की घाटी को बनाया,

ड्रैगन ने नया निशाना है ।

श्वेत धवल लद्दाख की जमीन,

पर करते हमला कायराना है ।

और किसी ने कागज़ पर,

बदला देश का नक्शा है,

पर शायद वे भूल गए हैं,

हम पर गर आ जाये तो नहीं किसी को बख्शा है।

घात पर अब प्रतिघात करेंगे,

दुश्मन को उनकी औकात दिखेगी।

याचना नहीं अब रण करेंगे,

तब जाकर हर शहीद को सच्ची श्रद्धांजलि मिलेगी ।

आज वक्त की मांग यही है,

दुश्मन न बच के जाने पाये।

तब न होगी कोई हिमाकत,

और न ही कोई आँख दिखाये।

आज हिमालय की चोटी से,

दुश्मन ने ललकारा है ।

वीर उठो हे धीर उठो,

अब आया वक्त हमारा है ।

            

                   



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