वीर रस से भरी आजादी
वीर रस से भरी आजादी
वीर रस से भरी आजादी,
इसको पहचानो तुम,
बीते वर्षों की गाथाएँ ,
आज फिर से जानो तुम,
बलिदान दे दिया पर ,
किसी पर आंच न आई,
भर दो जोश मन में,
एक नया इतिहास बनाओ तुम,
वीररस से भरी आजादी,
कर्मवीर याचक बनो तुम,
सीना ताने खड़े रहते जो,
वो वीर निर्भिक हो तुम I
अपने राष्ट्रध्वज का ,
करो दिल से सम्मान तुम,
अपनी आजादी के हो ,
प्रखर प्रकाश पुंज तुम,
उस नवीन भोर में,
नव चेतना लिए नव सूर्य उगेगा,
आने वाले उस नवीन कल की,
हो सिर्फ कल्पना तुम ,
वीर रस से भरी आजादी,
इसको पहचानो तुम,
बीते वर्षों की गाथाएँ ,
आज फिर से जानो तुमI
जो मिली आजादी ,
उनकी कीमत पहचानो तुम,
जात- पात से दूर ,
इंसानियत को पहचानो तुम,
जिस आजादी से उमड़ रहा है ,
उत्साह तुम्हारे मन में,
पहले उस आजादी के ,
लक्ष्य बिंदु को जानो तुम,
वीर रस से भरी आजादी ,
इसको पहचानो तुम,
बीते वर्षों की गाथाएँ,
आज फिर से जानो तुमI
जीवन का आधार आजादी,
इतना साहस बटोर हो तुम,
मिट्टी को सोना बना दो,
भारत भू को जानो तुम,
जो वीर दिन रात एक करते,
अपने देश की रक्षा के लिए,
उन वीरों की इस,
मेहनत को पहचानो तुम
वीर रस से भरी आजादी ,
इसको पहचानो तुम,
बीते वर्षों की गाथाएँ,
आज फिर से जानो तुमI
