विदाई
विदाई
अपनों के बीच परायों का एहसास कराता,
यह शब्द बेटियों को बचपन से सुनाया जाता।
बेटियों को बुरा इसलिए समझा जाता,
विदाई हिस्सा है बेटियों के जीवन का, यह बताया जाता।
पैसों में इतनी ताकत दो रिश्ते बदल जाते,
ख़ुद की बेटी बोझ लगती जब विदाई के दिन करीब आते।
एक गलती की सज़ा पर लाखों सुनाया जाता,
यह विदाई के बाद की रस्म का हिस्सा बताया जाता।
सहन करने की शक्ति बेटियों को सिखाते,
बाद में मरने पर क्यों आँसू बहाते।
कुछ कहने पर हजार खोट निकालते,
बाद में भाग्य पर कहकर क्यों हैं टालते।
परवरिश क्यों बदल जाती बेटे और बेटियों की,
एक पल में बेटियाँ पराई कैसे हो जाती।
खून के रिश्ते एक पल में इतने बदल जाते,
दूसरे की कहकर हाथ छुड़ा लिए जाते।
यह शब्द ज़हर बन गया बेटियों के लिए,
विदाई का यह अर्थ है तो हजार मौत मंज़ूर है हमें।
