विचारों का प्रदूषण
विचारों का प्रदूषण
प्रदूषण, वो भी विचारों का
उफ्फ,सिवाए गदंगी के
कुछ भी साफ नज़र न आए
जहाँ भी जाए गंदगी फैलाए।
जैसी होगी सोच वैसा होगा परिणाम
तन मन दोनों ही होंगे दूषित सरेआम
नकारात्मकता की होगी भरमार
सही में भी गलत दिखेगा यही मार।
जब प्रदूषण का कीड़ा विचारों में आ जाता
दिमाग को धीरे धीरे खोखला कर जाता
चाह कर भी इंसान सही सोच ना पाता
धीरे-धीरे पाप के गर्त में ढलता जाता।
जीवन में अगर सुखी रहना चाहते हो
विचारों को हमेशा रखो शुद्ध और पवित्र
योग और अध्यात्म के भाव को अपनाओ
विचारों के सौदर्य से जग को इत्र सा महकाओ।
