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V. Aaradhyaa

Inspirational

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V. Aaradhyaa

Inspirational

वह मानिनी स्त्री है

वह मानिनी स्त्री है

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वह मानिनी स्त्री है ,उसमें शक्ति अपार है,

आज नारी पर टिका हुआ सारा संसार है !


चलती है मानिनी स्त्री सदा एक शूल पर,

स्त्री के रक्त से शूल भी बन जाते हैं फूल !


लोग कितना भी बिछाएं उसके पथ में कांटे,

पर...स्त्री तो उसे फूल बना के ही सब में बांटें !


स्त्री में बहुत ममता और सहनशीलता होती है,

क्योंकि, स्त्री की नज़र में एक समता होती है !


दर्द सहना एक स्त्री से बढ़कर कौन जानती है,

स्त्री चुप रहकर परिवार को जोड़कर रखती है !


कभी तो पति के लिए तो कभी बच्चों के लिए,

कभी तो समाज के लिए तो कभी धर्म के लिए !


स्त्री ने सहा आग में जलना, बाजार में बिकना,

स्त्री ने सीखा जीवन की चुनौती स्वीकार करना !


अब स्त्री न किसी से डरती है और न रुकनेवाली है,

आगे के दिनों में स्त्री पूरी दुनिया में छा जानेवाली है !


स्त्री को कुछ देना है तो उसको सिर्फ आशीर्वाद दीजिए,

उसके रास्ते में अब कोई पत्थर मत अटकाया कीजिये !



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