Ashish Tyagi
Tragedy
ऊपर वाले का नियम है, वो सिखलाता रहता है
कभी बुरे, कभी अच्छे दिन दिखलाता रहता है,
सीख सको तो सीखो, ये, कई सौ सालों में होता है
जीव जंतु उन्मुक्त और इंसां बंद पिंजरों में सोता है।
ऊपर वाले का न...
दीया
मरकज और कोरोन...
तुम
मुस्कुराहट को...
धरती कांपी, अंबर कांपा, कांप रहा है जग-संसार घर-घर है मटियाले चूल्हे। धरती कांपी, अंबर कांपा, कांप रहा है जग-संसार घर-घर है मटियाले चूल्हे।
देख लेना एक दिन तुम्हें हमसे प्यार होगा मन तड़पेगा सखे तुम्हारा बेकरार होगा। देख लेना एक दिन तुम्हें हमसे प्यार होगा मन तड़पेगा सखे तुम्हारा बेकरार होगा।
प्रवासी सा हो गया सबका जीवन, किसी को अपनेपन का अहसास नहीं। प्रवासी सा हो गया सबका जीवन, किसी को अपनेपन का अहसास नहीं।
देख लोगो को रोते हुए ज़ोर से लाश एक हँस पड़ी। देख लोगो को रोते हुए ज़ोर से लाश एक हँस पड़ी।
कान बंद करने पर भी गूंज रही थी वो गाली । कान बंद करने पर भी गूंज रही थी वो गाली ।
शर्म नही सत्ता को कुछ भी भले मरें बिन दाना पानी। शर्म नही सत्ता को कुछ भी भले मरें बिन दाना पानी।
क्या रक्खा अब यार गाँव में। नहीं रहा जब प्यार गाँव में। क्या रक्खा अब यार गाँव में। नहीं रहा जब प्यार गाँव में।
प्रभुजी आप हृदय बैठे, सही राह दिखलाते हैं। प्रभुजी आप हृदय बैठे, सही राह दिखलाते हैं।
क्यूँ ब्याहता को मौन का मुखौटा पहनाया जाता है क्यूँ ब्याहता को मौन का मुखौटा पहनाया जाता है
बोझ नहीं उपहार है बेटी उस खुदा की कुदरत व रहनुमाई का बोझ नहीं उपहार है बेटी उस खुदा की कुदरत व रहनुमाई का
ना मर्म का मेरे भान किसी को, लेकिन फिर भी जिंदा हूँ। ना मर्म का मेरे भान किसी को, लेकिन फिर भी जिंदा हूँ।
जार- जार मन रोता उसका अब आता सरपंच नहीं। जार- जार मन रोता उसका अब आता सरपंच नहीं।
जब गर्भ में बच्चा आता है,इम्तिहान शुरू हो जाता है. जब गर्भ में बच्चा आता है,इम्तिहान शुरू हो जाता है.
हालत गंभीर है कितने मरीजों की, न जाने, होगा क्या अंजाम।। हालत गंभीर है कितने मरीजों की, न जाने, होगा क्या अंजाम।।
पूर्ण न होता जीवन में कोई, कमी मिलेगी हर कहीं छोट-बड़ई की बात नहीं ये. पूर्ण न होता जीवन में कोई, कमी मिलेगी हर कहीं छोट-बड़ई की बात नहीं ये.
रामपाल अब नहीं लगाता है कुर्ते में नील। उसकी खुशियाँ उसके सपने वक्त गया सब लील। रामपाल अब नहीं लगाता है कुर्ते में नील। उसकी खुशियाँ उसके सपने वक्त गया सब ली...
सर झुका दूँ तेरे दर पर, ये मुझे करना नहीं जान दे दूं हंस के लेकिन डर के है मरना नहीं। सर झुका दूँ तेरे दर पर, ये मुझे करना नहीं जान दे दूं हंस के लेकिन डर के है मर...
झूठ आकर सत्यता को छल रहा है। आज घर-घर साँप बिच्छु पल रहा है। झूठ आकर सत्यता को छल रहा है। आज घर-घर साँप बिच्छु पल रहा है।
ओ हिन्दी! हिंदुस्तान की वाणी, दर्द दिल में तेरा मां चुभता है। ओ हिन्दी! हिंदुस्तान की वाणी, दर्द दिल में तेरा मां चुभता है।
खो गया अपना बचपन सारा, वक़्त की आपा-धापी में । खो गया अपना बचपन सारा, वक़्त की आपा-धापी में ।