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Sarita Kumar

Inspirational

4  

Sarita Kumar

Inspirational

ऊंची उड़ान

ऊंची उड़ान

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ऊंची उड़ान

गुज़र गया वो मंजर 

जब दिल बेताब था 

मचलती थी धड़कनें 

हर एक आहट पर 

सुबह से शाम 

और रात से सहर 

हर पल एक ही नाम 

एक ही ख्याल और 

एक ही ख्वाहिश 

अब रीत गए हैं 

ख्वाबों के आसमान 

जहां भरते रहें ऊंची उड़ान 

अब .......

यथार्थ के कठोर धरातल पर 

रख दिए हैं अपने पांव ... 

पहनकर पायल , कस लिया लगाम 

अंगुलियों में बिछुआ को दबाया है 

हर पल यह एहसास पाने को 

ये नन्ही नन्ही सी बिछुआ 

नियंत्रित करती हैं स्त्री के स्त्रीत्व को

संभालती हैं हमारे वजूद को 

ब्रह्मांड को संतुलित रखने का भार है हम पर 

इसलिए स्वीकार लेती हैं अजनबी रिश्ते को 

बिन जाने , पहचाने और भुला देती हैं 

अपने बचपन के सपनों को 

कुछ संगी साथी और कुछ अपनों को 

साड़ी के पल्लू में खोंस लेती हैं अपने जज्बात ..... 

फिर......मुस्कुराती है बेहद बिंदास ।


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