उठो बच्चो बिस्तर छोड़ो
उठो बच्चो बिस्तर छोड़ो
उठो बच्चों बिस्तर छोड़ो
सुबह का तारा चमका है
धरती का कोना - कोना
देखो कैसे चमकता है
आलस छोड़ो निश्चय कर लो
कदमों को न रोको तुम
खुद में इतना जोश भर दो
दिशाओं को रोशन कर दो तुम
गर राह सही अभी चुनोगे
वही लक्ष्य तुम्हारा होगा
खुद को तुम सशक्त कर लो
संकल्प भरा हर सवेरा होगा
मन में जो भी प्रश्न होंगे
खुल कर उनपर विचार करो
अपने चित को संभाले रखो
पुस्तकों से आंखें चार करो
फिर देखो कैसे वक़्त बदलेगा
रेगिस्तानों से जल निकलेगा
मेहनत के बीज बोना
हर वृक्ष से फल निकलेगा
उठो बच्चों बिस्तर छोड़ो
उत्साह को न मरने दो
खुद पर तुम विश्वास रखो
सपनों को न बिखरने दो........
