STORYMIRROR

Kavi Dilip Kushwah

Drama

2  

Kavi Dilip Kushwah

Drama

उतार-चढ़ाव

उतार-चढ़ाव

1 min
229

जीने की आपाधापी जीवन की भाग दौड़

मंजिलों का लालच जीतने की रही होड़।


हजारों सपने पाले हमने अपनी आंखों में

करोड़ों की सांसे गिरवी रखी लाखों में।


दुखों का पहाड़ देखा खुशियों से रहा लगाव

इस तरह आते रहे जीवन में उतार-चढ़ाव।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama