उस पल लगे दीवाली है
उस पल लगे दीवाली है
उस पल लगे दीवाली है
जब घर-घर दीप जलें
फूल जब चारों और खिलें
किसान के खेत में फसलें महके,
चिड़िया जब पेड़ों पर चहरे
उस पल लगे दीवाली है
बच्चे जब झूमें, नाचें, गाएं
माँ संग बेटा कुछ पल बिताए
बिछड़े हुए को जब अपने मिल जाए,
चेहरे पर सबके मुस्कान आ जाएं
उस पल लगे दीवाली है
जब मौत से रोगी बच जाएं,
जब अंधे व्यक्ति को दुनिया दिख जाएं
गरीब के घर उजाला हो जाएं,
जब सब की मेहनत रंग लाये,
उस पल लगे दीवाली है
जब न कौई किसी से रूठे,
जब स्वार्थ से परे सब काम हो
वाणी में सब की मिठास हो,
राह जीने की जब आसान हो
उस पल लगे दीवाली है
