Navin Madheshiya
Fantasy
थका थका ये शरीर है
थका थका ये जान है
थके थके से लोग है
थका थका अरमान है
यादें
तपिश
बातें अपनी
एक फूल
प्रेम: एक विश...
तेरे हर गीत म...
औरत
शब्दों की महि...
शब्द
इस्तेहार निकालो चलो, किराएदारों को अब रहने बुलाया जाए। पर सुनो ये भी संभव है की रह जाए , यंहा सिर्फ ... इस्तेहार निकालो चलो, किराएदारों को अब रहने बुलाया जाए। पर सुनो ये भी संभव है की ...
फल तो़ड़कर खाती और पक्षियों के घोंसले सजाती थी। फल तो़ड़कर खाती और पक्षियों के घोंसले सजाती थी।
माखन होती अगर मैं मथुरा की माखन होती अगर मैं मथुरा की
यूं ही नहीं हर्षिता की नज़र में उतरता कोई अब वहीं नज़र में एक अंगार हो गए। यूं ही नहीं हर्षिता की नज़र में उतरता कोई अब वहीं नज़र में एक अंगार हो गए।
दिलों ओ दिमाग में छाई है तेरे यादों की परछाई। दिलों ओ दिमाग में छाई है तेरे यादों की परछाई।
देखा होता है उसने, सभ्यताओं को बसते और ढहते, बस्ती को गाँव, गाँव को नगर, नगर को महानगर बनते, ख़ु... देखा होता है उसने, सभ्यताओं को बसते और ढहते, बस्ती को गाँव, गाँव को नगर, नगर ...
दुनिया में सबसे न्यारी हिंदी। भाषा में सबसे प्यारी हिंदी। दुनिया में सबसे न्यारी हिंदी। भाषा में सबसे प्यारी हिंदी।
हे भारत मां ! मैं तेरा पुत्र हूँ इस बात का मुझको गर्व है, आज है स्वतंत्रता दिवस ये हम हे भारत मां ! मैं तेरा पुत्र हूँ इस बात का मुझको गर्व है, आज है स्वतंत्रता दि...
डगमग डगमग गोते खाए नैय्या मेरी चलती जाए। डगमग डगमग गोते खाए नैय्या मेरी चलती जाए।
वक़्त गुज़रता रहा मग़र इक कतरा रच न पाया वक़्त गुज़रता रहा मग़र इक कतरा रच न पाया
हर मुश्किल में भी साया बनूँगी बस तुम मेरी ताकत को न छोड़ना। हर मुश्किल में भी साया बनूँगी बस तुम मेरी ताकत को न छोड़ना।
प्रारम्भ हुआ फिर ऋतु- चक्र, शीतल बयार ने गति अपनाई! प्रारम्भ हुआ फिर ऋतु- चक्र, शीतल बयार ने गति अपनाई!
भीख मांगी नहीं जाती इससे मेहनती है, आखिर मज़दूर है। भीख मांगी नहीं जाती इससे मेहनती है, आखिर मज़दूर है।
नदी की जरूरत शारीरिक से अधिक मानसिक है नदी की जरूरत शारीरिक से अधिक मानसिक है
हर लहर में होता है समुद्र पर हर लहर समुद्र तो नहीं कहलाती। हर लहर में होता है समुद्र पर हर लहर समुद्र तो नहीं कहलाती।
हो गया गर्भपात हो गया गर्भपात
उनके पैर की झांझर दिन रात रांझा रांझा कहती थी, वो भी आज कल हीर सी बावरी रहती थी। उनके पैर की झांझर दिन रात रांझा रांझा कहती थी, वो भी आज कल हीर सी बावरी रहती...
काले मेघों का गर्जन सुनकर, सकल धरा फिर काँपी थर थर। काले मेघों का गर्जन सुनकर, सकल धरा फिर काँपी थर थर।
मेरा प्यार है, करार है, जन्नत की है कोई हूर तू। मेरा प्यार है, करार है, जन्नत की है कोई हूर तू।
मैं से मेरा होना प्रमाण है पत्र है मेरा हर चीज का प्रमाण पत्र प्रमाण है मेरा। मैं से मेरा होना प्रमाण है पत्र है मेरा हर चीज का प्रमाण पत्र प्रमाण है मेरा...