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Rishab K.

Abstract Classics Inspirational

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Rishab K.

Abstract Classics Inspirational

त्योहार

त्योहार

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एक तरफ़ है गुझिया और रँग। दूसरी तरफ है हलवा और रौशनी फैलाते चराग। एक कह रहा कि ज़िन्दगी में सारे रँग घोल दो। दूसरा कह रहा चराग जलाकर रौशनी बिखेर दो। एक कह रहा कि अन्दर की बुराई मिटाकर, हर रंग को अपनाकर, झूम उठो। दूसरा कह रहा कि खुद को ईश्वर से जोड़ दो, ताकि मोहब्बत और इंसानियत बढ़ने का रास्ता मजबूत हो।

यह घटना पूरी दुनिया में सिर्फ भारत में ही तो घट रही है। जहाँ एक ओर रंगों का त्यौहार होली है तो दूसरी ओर इबादत का दिन शब ए बारात है। सोचिए, वह कितने खुशनसीब लोग होंगे, जिन्हें गुझिया और हलवा दोनों खाने को मिलें। जिन्हें दिन में रँग और शाम में मोमबत्ती संग खुशबू फैलाने को मिले। यह हर एक कि किस्मत नही है, क्योंकि जिनके दिलों में सब रँग, सब खुशबू, सब खुशी शामिल होंगी, वह ही तो दोनों त्यौहारों के मज़े ले सकेंगे।


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