STORYMIRROR

Neeraj pal

Abstract

3  

Neeraj pal

Abstract

तुमसा कोई नहीं।

तुमसा कोई नहीं।

1 min
251

तुम सा ना दूजा कोई ।

नाम अनेक तुमने धारे, पर तुम सा ना कोई ।।


तू ही है जग का रखवाला, चाहे राम कहो या रहीम।

सब ही हैं दिखते एक जैसे, रचना तेरी बड़ी असीम ।


दीन -दुखियों में तू ही रमता, इतना पावन पाक है तू।

आर्त-हृदय से जिसने भी पुकारा, दयालुता की मिसाल तू।।


 जिसने भी जिस नाम से पुकारा, वही रूप सबको तुम दिखलाते।

"नीरज" का तो पता नहीं, फिर भी सब पर तुम कृपा बरसाते।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract