STORYMIRROR

Mithilesh Tiwari "maithili"

Abstract Romance

4  

Mithilesh Tiwari "maithili"

Abstract Romance

तुम्हारे लिए

तुम्हारे लिए

1 min
699

  

लो आज फिर मैंने

रूप को सजाया है तुम्हारे लिए

पूनम की चाँदनी से

धोया तन-मन को मैंने

माथे पर चाँद को सजाया है तुम्हारे लिए

सिंदूरी शाम की

रंगत चुराकर मैंने

तारों से मांग को सजाया है तुम्हारे लिए

रात को बना काजल

आँखों पे लगाया है मैंने

सितारों की चूनर से साज को छिपाया है तुम्हारे लिए

प्रणय लाली से होठों को रंग दो प्रियतम

अब तक इन्हें मैनें 

कोरा ही रखा है तुम्हारे लिए ।।


       



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract