STORYMIRROR

PRAVESH KUMAR SINHA

Inspirational

4  

PRAVESH KUMAR SINHA

Inspirational

तुम सृष्टि हो

तुम सृष्टि हो

1 min
291

निराशा भरी तम सा जीवन को

आकर भरता प्रकाश खुशी का

दिशाहीन को वो राह दिख लाता

इससे ही बढ़ता पहिया सृष्टि का


सूर्य तम की चादर को चीरकर

कर रहा फिर से नयी शुरुआत

संग में जीवन की प्रेरणा लेकर

फिर से दे रहा अंधेरा को मात


एक नन्हा सा बीज अंकुरित होकर

अपना कोमल पंख पसारा है देखो

मिट्टी, पानी और सूर्य से ऊर्जा लेकर

दूजे को देता हमेशा सहारा है देखो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational