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GOPAL RAM DANSENA

Abstract Tragedy Inspirational

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GOPAL RAM DANSENA

Abstract Tragedy Inspirational

तुझ पर मन तनी गहराई है

तुझ पर मन तनी गहराई है

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जब मस्त हो बहार आती है

श्रंगार कर प्रकृति इठलाती है

सु स्वर श्रवण घनी अमराई है

तुझ पर मन तनी गहराई है I

मेघ गर्जन सर सर स्वर है

धरा अंबर सब दर तर है

अपलक नयन, मन भर आई है

तुझ पर मन तनी गहराई है I

नदी ताल जल, प्रवाह पल पल

अटूट नाद, संगीत मय अंचल

नीर संग खग चहक आई है

तुझ पर मन तनी गहराई है I

सुना उदर चुभती धूप है

थिरकते पांव, उल्लासित रूप है

जीवन का क्षण, आनन्द समायी है

तुझ पर मन तनी गहराई है I

कोई तुझे जाने, वहां नहीं विराम है

देखें तुझे कहां, तू नयनाभिराम है

तेरी छवि कण कण में बन आई है

तुझ पर मन तनी गहराई हैI


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