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Phool Singh

Tragedy Inspirational Others

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Phool Singh

Tragedy Inspirational Others

ट्रांसजेंडर

ट्रांसजेंडर

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हीरे-मोती, माणिक पहन मैं

रोज यहाँ-वहाँ मंडराता

न मैं स्त्री न पुरुष हूँ

अभागा किन्नर हूँ कहलाता।।


मात-पिता न भाई-बंधु

न कोई रिश्तेदार मेरा कहलाता 

घर-परिवार में जगह न मेरी

न समाज ही मुझे अपनाता।।


शिक्षा-सुरक्षा से वंचित रहता 

न सम्मान जहां में पाता

अवसादों से घिरा हुआ मैं

जीवन अलगाव-एकाकीपन का जीता।।

 

मेरी दर्द-पीड़ा की किस को पड़ी है 

चाहे किसी पर जान लुटाता 

एहसास की मेरे कदर न जाने 

चाहे दिल चीर के मैं दिखलाता।।


शुभ मुहूर्त में खुशी मनाता

आशीर्वाद भी देकर जाता 

कोई खुश न होता मुझे देखकर 

क्या इंसान नहीं मैं होता।।


तड़प-तड़पकर काटता हर पल

पर किसी को कुछ न कहता

न जीने-मरने की मेरी फिक्र किसी को

किन्नर होने का मोल चुकाता।।


ट्रांसजेंडर के अधिकार से वंचित 

मूल अधिकार भी मैं न पाता

स्वीकार न करता मुझको कोई भी 

नजर हर जन मुझसे चुराता।।

 

सार्वजनिक शौचालय तक न मेरी पहुँच है 

वहाँ भी लज्जित होता

वोट देने का अधिकार है मुझको 

लेकिन वोट न देने पाता।।

 

प्रतिनिधि अपना चुन न सकता

न कोई मेरे हक में आवाज उठाता 

रोजगार लाइसेंस प्राप्त न होता 

वहाँ भी अछूत हूँ कहलाता।।

 

जीवनयापन करूँ मैं कैसे

न नौकरी-व्यापार की सुविधा पाता  

नाच-गाकर मैं भीख न मांगूँ तो

सेक्स वर्कर काम ही बचता।।


समुदाय-संपत्ति अधिकार से वंचित हूँ मैं 

बहिष्कृत-उपेक्षित समाज से रहता 

कलंक समझते समाज के लोग मुझे

न किसी से मेरा नाता।।


सामाजिक और सांस्कृतिक में न मेरी भागीदारी

समानता-संवैधानिक संरक्षण से वंचित रहता

कानून की नजर में सब समान है

पर ये वास्तविकता में कभी न दिखता।।


उत्पीड़न, दुर्व्यवहार और निजी भेदभाव का सामना करता

जबकि मानवाधिकार का है ये मुद्दा

विधेयक भी यहाँ पास हो जाते

न समाज अमल में इसको लाता।।

 

सख्त दंड का विधान है लेकिन

दंड न कोई भी पाता 

पुनर्वास, स्व-रोजगार और स्वास्थ्य सेवा का अधिकार प्राप्त है 

पर उसका लाभ न किसी को मिलता।। 


मोह-माया न इच्छा-तमन्ना

इंतज़ार में मौत के रहता

अंत समय में भी गाली खाता

घोर बेइज्जती सहता।।


बीपीएल श्रेणी में आते है हम

वेलफेयर बोर्ड का गठन भी होता

स्त्री-पुरुष भारत के लोग कहलाते 

क्या किन्नर भी हिन्दुस्तानी कहलाता?


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