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Pawanesh Thakurathi

Romance

4.3  

Pawanesh Thakurathi

Romance

त्रिज्या से व्यास बन गई हूँ

त्रिज्या से व्यास बन गई हूँ

1 min
554


हरी-भरी धरती थी

अब तो नीला आकाश बन गई हूँ

तेरे प्रेम में ओ पगले ! 

त्रिज्या से मैं व्यास बन गई हूँ। 


तू क्या जाने

मेरे जीवनवृत्त की

एकमात्र परिधि तू ही है

अब बावली होकर 

तेरे दिल की

आनी-जानी सांस बन गई हूँ


तेरे प्रेम में ओ पगले ! 

त्रिज्या से मैं व्यास बन गई हूँ। 


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