Abhishek Shukla
Romance
मुझे महंगे तोहफ़े बहुत पसंद हैं,
जैसे वक़्त, मुख़लिसी, ऐतबार, इज़्ज़त और चाय।
-जुस्तजू
तोहफ़े
जुस्तजू
जुस्तजू-किसान
वक़्त
बूंदे
तन्हाई
7th मई
तनहा -2
अचानक ही तो मिले थे हम दोनों समय और संस्कारों की यात्रा में। अचानक ही तो मिले थे हम दोनों समय और संस्कारों की यात्रा में।
तुम खुशियों के शीशमहल में, तुम मेरी तन्हाई में.. तुम खुशियों के शीशमहल में, तुम मेरी तन्हाई में..
तब अपने अपने धर्म को उच्च बताने का ये समाज करते हैं व्यापार। तब अपने अपने धर्म को उच्च बताने का ये समाज करते हैं व्यापार।
एक तुम्हारा दिल और एक परछाई, जो मेरे दिल की थी। एक तुम्हारा दिल और एक परछाई, जो मेरे दिल की थी।
"फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं बहारों से चुराकर थोड़ी महक लाया हूं। "फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं बहारों से चुराकर थोड़ी महक लाया हूं।
हे राधे ! क्या मुझे छोड़ने तुम नही आओगी तुम अपने कान्हा को विदाई दे पाओगी हे राधे ! क्या मुझे छोड़ने तुम नही आओगी तुम अपने कान्हा को विदाई दे पाओगी
बस तुम यूं ही आ जाना...। बस तुम यूं ही आ जाना...।
कहता है वो पिता है अपने बच्चे को कविता मे सांस लेते महसूस करता है। कहता है वो पिता है अपने बच्चे को कविता मे सांस लेते महसूस करता है।
एक गीत अपनी मोहोब्बत के लिए।। एक गीत अपनी मोहोब्बत के लिए।।
मैं तो अपने को भूल रहा, तुम कर लेती हो याद मुझे। मैं तो अपने को भूल रहा, तुम कर लेती हो याद मुझे।
मैं जहाँ हूँ, जिस मोड़ पर हूँ मुझे सब बेईमानी लगना चाहिए था। मैं जहाँ हूँ, जिस मोड़ पर हूँ मुझे सब बेईमानी लगना चाहिए था।
वो एक दूसरे को पीठ ज़रूर किए बैठी है लेकिन एक दूजे से बेइन्तहा इश्क़ भी किए बैठी है। वो एक दूसरे को पीठ ज़रूर किए बैठी है लेकिन एक दूजे से बेइन्तहा इश्क़ भी किए ...
हँसी के उस दीदार में, साथ देने वाले प्यार में सोचो मत, आओ भर दो अपना नाम। हँसी के उस दीदार में, साथ देने वाले प्यार में सोचो मत, आओ भर दो अपना न...
मैं बन जाती थी आसमान, वो तारा बनकर मुझमें बिखर जाता था... मैं बन जाती थी आसमान, वो तारा बनकर मुझमें बिखर जाता था...
हर एक एक पल सदियों की तरह बहने लगे है सीने से हमारे इस प्रेम त्रासदी में कि जैसे लगने लगा है ग... हर एक एक पल सदियों की तरह बहने लगे है सीने से हमारे इस प्रेम त्रासदी में क...
जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो। जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो।
पहली मुलाकात और उसकी खुशियां, याद करें-आप भी तो साझेदार थे। पहली मुलाकात और उसकी खुशियां, याद करें-आप भी तो साझेदार थे।
गिनना चाहती हूँ तारों को मैं, चाँद पर बैठना चाहती हूँ, थोड़ी देर... गिनना चाहती हूँ तारों को मैं, चाँद पर बैठना चाहती हूँ, थोड़ी देर...
जब कभी धीमी हवा मुझे छू कर बहती है, तब पता नहीं क्यों मेरे दिल में कहीं बेचैनी सी हो जब कभी धीमी हवा मुझे छू कर बहती है, तब पता नहीं क्यों मेरे दिल में कहीं...
मैं मचलती हूँ सात सुर-सी बजती वीणा-सी, कोई नश्तर नहीं मेरे वज़ूद के आसपास... मैं मचलती हूँ सात सुर-सी बजती वीणा-सी, कोई नश्तर नहीं मेरे वज़ूद के आसपास...